करेंसी पर बापू की फोटो, लाल किले पर तिरंगा
सड़क पर भारत माता की जय और स्कूलों में विंध्य हिमाचल यमुना गंगा,
क्या सिर्फ इतनी आजादी काफी है?
क्या सिर्फ इतनी सी आजादी के लिए वो जनेऊधारी कंपनीबाग में ब्रिटिश फौज से लड़ गया और वो २३ साल का सरदार रंग दे बसंती गा के फांसी पर चढ़ गया था?
क्या सिर्फ डेढ़ गज कपड़े के लिए नेताजी ने हिटलर को आंख दिखाई थी और बापू ने क्या सिर्फ नोट पर छपने के लिए सीने पर गोली खाई थी?
आजादी वो है जब पैरों को छालों का डर ना रहे और सच को सवालों का
आजादी वो है जो ना सपनों के दरख्त फैलने से डरे और ना टूटी हुई चप्पलें डिजायनर जूतों के साथ चलने से
आजादी वो है जब झुके हुए सिरों का मुकद्दर बदल जाए और झोपड़ियों के दिल से हवेलियों का डर निकल जाए
आजादी वो है जब हौंसले की चिड़िया बाधाओं का पिंजरा तोड़ दे और क ख ग, A B C से डरना छोड़ दें
आजादी वो है जब अमन का गीत गाते हुए गले से लहू ना आए और अमरूदों के मौसम में बारूदों की बू ना आए
वेखौफ जीना हमारा हक है और ये हक बुनियादी है
घबराओ मत बढ़ते रहो बस अगले मोड़ पर थोड़ा सा आगे आजादी है।।
जय हिंद , जय भारत
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